Monday, July 20, 2026
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सुल्तानपुर बीएसए उपेंद्र गुप्ता की जब कई मामलों में हुई किरकिरी,जारी कर दिया अजीबोगरीब फरमान

सुल्तानपुर।यूपी विधानसभा के बजट सत्र में योगी सरकार के मंत्री संदीप सिंह ने अभी शिक्षामित्रो को तोहफा देते हुए बेसिक शिक्षा महकमें को सुदृढ़ बानने के लिए कृत संकल्पित नजर आए।वही सुल्तानपुर में बेसिक शिक्षा अधिकारी
(बीएसए) उपेंद्र गुप्ता ने तुगलकी फरमान जारी किया है। उन्होंने सभी प्रधानाध्यापकों को लिखित निर्देश दिए हैं कि, ‘बिना अनुमति विद्यालय में किसी भी बाहरी व्यक्ति को प्रवेश नहीं दिया जाए।’ बीएसए के इस आदेश को इस बात से जोड़कर देखा जा रहा है कि हाल के दिनों में जहां स्वयं उन पर कई एक आरोप स्कूल प्रांगण से ही लगे हैं वहीं कई स्कूलों की कारगुजारियां एक के बाद एक मीडिया के कैमरे पर आ गई। जिसे वे चाह कर भी मैनेज नहीं कर सके।

अपने पत्र, पत्रांक संख्या, बेसिक/41236-4//2025-26 दिनांक 26/02/2026 के माध्यम से बीएसए ने परिषदीय प्राथमिक/उच्च प्राथमिक/ कम्पोजिट विद्यालय के सभी प्रधानाध्यापक/इंचार्ज प्रधानाध्यापक को निर्देशित किया कि अपने विद्यालय के मुख्य द्वार/विद्यालय की चहार दीवारी/विद्यालय परिसर में किसी स्थान पर पेन्ट करवाकर अधोलिखित सूचना को छात्रहित एवं शिक्षक हित में तत्काल लिखवाना सुनिश्चित करें।

“बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के विद्यालय अवधि में कोई भी व्यक्ति विद्यालय में प्रवेश नहीं करेगा। अगर कोई व्यक्ति ऐसा करता पाया जाता है, तो छात्र एवं शिक्षक हित में सम्बन्धित व्यक्ति के विरूद्ध कठोर दण्डात्मक / विधिक कार्यवाही की जायेगी, जिसके लिए सम्बन्धित व्यक्ति स्वंय उत्तरदायी होगा।” बीएसए ने लिखा है कि उक्त आदेश का कड़ाई से अनुपालन करना सुनिश्चित करें, यदि आप द्वारा उक्त आदेश के अनुपालन में शिथिलता बरती जाती है तो, सम्बन्धित का उत्तरदायित्व निर्धारित किया जायेगा।

हैरत की बात ये है कि बीएसए उपेंद्र गुप्ता ने अपने पूरे आदेश में किसी शासनादेश का कोई हवाला नहीं दिया है। जिससे स्पष्ट है कि वे स्वयं को शासन से ऊपर समझ बैठे हैं। दरअस्ल बीएसए के स्वयं घोषित आदेश के पीछे वजह ये है कि हाल में लंभुआ के सरकारी स्कूल वैनी में बच्चों को स्कूल में बंधक बनाने का वीडियो सामने आया। जिस पर उनके विभाग की जमकर फ़जीहत हुई। हाल में ही कादीपुर के मकदूमपुर के प्रभारी प्रधानाध्यापक ने उन पर व अन्य अधिकारी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। प्रभारी प्रधानाध्यापक का वीडियो स्कूल में ही रिकॉर्ड हुआ जो बीएसए के रोके नहीं रुक सका। अंत में शिक्षक संघ के अध्यक्ष को लगाकर उन्हें डैमेज कंट्रोल करना पड़ा।

फिर कोतवाली देहात के एक स्कूल में शिक्षा मित्र ने कक्षा दो की छात्रा से अश्लीलता किया। इसके वीडियो भी स्कूल में रिकॉर्ड हुए, जहां पर छात्राओं ने शिक्षामित्र को ही नहीं हेड मास्टर (मोटे सर/बड़े सर)भी ऐसी हरकत करते है।लेकिन कार्यवाही में पक्षपात बीएसए ने किया जिससे ग्रामीणों/अभिभावकों में आक्रोश है। खैर बाद में शिक्षामित्र को जेल भेज इति श्री कर ली गई।वही स्पेशल एजुकेटर भर्ती प्रक्रिया के समय भी बीएसए पर गंभीर आरोप लगे थे। इसके बाद विभाग को दुरुस्त नहीं कर पाने वाले साहब ने उक्त फरमान जारी कर दिया।इस फरमान के पीछे बेसिक स्कूल की फजीहत न हो इसलिए सुधार न करने की बजाय इंट्री पर ही रोक लगा दिया है। इस फरमान की शिकायत डीएम,महानिदेशक स्कूल से की गई हैं।

यूपी बजट 2026-27 में बेसिक शिक्षा को बड़ी सौगात मिली है। 77,622 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। हर जिले में दो मॉडल स्कूल खुलेंगे। छात्र-छात्राओं को निःशुल्क यूनिफॉर्म व सामग्री मिलेगी। स्मार्ट स्कूल, बालिका आवासीय विद्यालय और शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा की घोषणा की गई।विधानसभा में प्रस्तुत वर्ष 2026-27 के बजट में प्रदेश की बेसिक शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर विशेष फोकस किया गया है। बजट प्रस्तावों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि सरकार प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षा के ढांचे में व्यापक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रही है।

Ashok Kumar Dwivedi (Advocate High Court),RTI Activist
To me, a lawyer is basically the person that knows the rules of the country. We’re all throwing the dice, playing the game, moving our pieces around the board, but if there is a problem the lawyer is the only person who has read the inside of the top of the box.