घटना के बाद से आनन फानन में हुई पुलिसिया कार्यवाही पर उठ रहे थे सवाल।
आरोपियों के परिजन कह रहे थे हुई गलत अरेस्टिंग,मौत में नहीं है संलिप्तता।
सुल्तानपुर।जिले में जब से तेज तर्रार एसपी चारु निगम ने कमान संभाली है तब से यदि कोई प्राइवेट पीड़ित है तो उसकी मदद अवश्य हुई हैं।यही नहीं क्रास मुकदमा दर्ज होने पर ब्रेक लग गया है।यही नहीं अपराध हुआ तो अपराधी चाहे जितना प्रभाव शाली रहा हो उसके मुकदमा लिखने व जेल की सलाखों के पीछे जाना तय हैं।
ऐसे ही एक मामला थाना गोसाईगंज के कारी बहार गांव से जुड़ा है। 29-जून को वादी बादल वर्मा की सोशल मीडिया पर प्रसारित अज्ञात सोर्स के मोबाइल के एक वीडियो पर आधारित तहरीर पर अभियोग के क्रम में विवेचनात्मक कार्रवाई प्रचलित की गई थी।जिसमें मृतक आजाद ने मौत से पहले चार पांच लोगों का नाम लिया था।जिसे पुलिस ने आनन फानन में अरेस्ट कर जेल भेज दिया।आरोपियों के परिजन ने पुलिस के साथ ही सोशल मीडिया पर मौत में संलिप्तता न होने की बात कही।प्रकरण में साक्ष्य संकलन के क्रम में ज्ञात हुआ कि मृतक आजाद वर्मा एवं उसके तीन साथी अभिषेक वर्मा पुत्र विजय बहादुर वर्मा उर्फ कल्लू, अभिषेक वर्मा पुत्र रामजनक वर्मा व अमन वर्मा पुत्र दिलीप वर्मा चारों अभिषेक वर्मा पुत्र रामजनक वर्मा की काली स्कॉर्पियो में एक नई अवैध पिस्टल लेकर आए थे। जिसमें उसे चलाने के प्रयास में अभिषेक पुत्र विजय बहादुर द्वारा एक्सीडेंटल फायर से एक गोली गाड़ी की सीट से आर-पार होकर मृतक आजाद वर्मा के कमर पर लग गई।जिसके उपरांत आपस में अमन वर्मा, इन सभी में विवाद हो गया और उसे गाड़ी से उतारकर तीनों लोग काफी देर गांव व उसके आसपास घूमते रहे।सोचे-समझे तरीके से खून तेजी से बहता देख, सीधे उसे स्कॉर्पियो से सुल्तानपुर ले गए। वहां पुलिस को सूचना देते हुए लखनऊ रवाना हो गए, जहां पूर्व प्रचलित क्रॉस अभियोगों से संबंधित अभियुक्त/ वादी एवं गवाहों में एक वीडियो बनवाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया।
उक्त विश्वसनीय एवं वैज्ञानिक तथ्यों से पुष्ट सूचना पर तीनों की तलाश की गई, तो पता चला कि तीनों घटना के बाद गांव से फरार हैं।उन्हें रात्रि 8-9, जुलाई को विश्वसनीय सूत्रों से सूचना प्राप्त हुई कि घटना के बाद अभियुक्त अभिषेक वर्मा पुत्र विजय बहादुर वर्मा व अभिषेक वर्मा पुत्र रामजनक वर्मा लखनऊ में कहीं शरण लिए हुए हैं, बताए हुए स्थान पर मिल सकते हैं।टीम भेजकर खोजा गया, तो थाना पीजीआई के वृंदावन योजना सेक्टर 16 से इन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। तो दोनों की निशादेही पर अभिषेक वर्मा पुत्र रामजनक वर्मा की घटना से संबंधित काली स्कॉर्पियो को बाईपास रेलवे ओवरब्रिज पकरौली से बरामद किया गया है।फील्ड यूनिट के माध्यम से तलाशी में वाहन से घटना में प्रयुक्त शस्त्र, खोखा कारतूस एवं खून मिला है तथा ड्राइविंग सीट के बगल वाली सीट में गोली के एंट्री और एग्जिट का छेद मौजूद है। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया है, विधिक कार्रवाई प्रचलित है।अब पूर्व में गए आरोपियों के परिजनों को उम्मीद हैं कि उनके लोग निर्दोष हैं जल्द ही जेल से बाहर आयेंगे।








