Monday, November 2, 2026
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सुल्तानपुर लोक निर्माण विभाग के टेंडर में खेल:-माननीयो के इशारे पर अधीक्षण अभियंता ने किया कारनामा

सुल्तानपुर(दस्तक भारत न्यूज)।भले ही प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का  टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता हेतु ई-टेंडर प्रणाली प्रहरी ऐप की व्यवस्था लागू की हो।विभाग के तैनात  पीडब्ल्यूडी  महकमे के जिम्मेदार अपने काले कारनामों को बरकरार रखे है। जिले के माननीयों के इशारे पर कुछ फर्म धारकों को लाभ पहुंचाने के लिए नियम कानून को ताक पर रख कर मोटी रकम की लालच में एक बड़ा खेल कर दिया है ।इसी मामले को लेकर प्रांतीय खंड पीडब्लूडी सुल्तानपुर के अधीक्षण अभियंता/ अधिशाषी अभियंता पर बड़ा मामला सामने आया हैं।इस मामले को लेकर योगी सरकार की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा ही गया है। मिली जानकारी के अनुसार इस पूरे खेल में कुछ सत्ताधारी भी शामिल है।

बताते चले कि  प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग ने  22 कार्यों के लिए अधीक्षण अभियंता के माध्यम से टेंडर आमंत्रित किया गया था जिसकी अंतिम तिथि 15 सितंबर थी परंतु ई-टेंडर प्रणाली का पहली बार मजाक उड़ाते हुए कार्य संख्या एक से आठ तक के कार्य छोड़कर बाकी कार्यों की तारीख 25 सितम्बर तक बढ़ा दी गई। हद तो तब हो गई जब एक से आठ तक के कार्यों पर अपने चहेतो से अतिरिक्त कम्पटीशन टेंडर पड़ गए तो आनन फानन में एक से आठ तक के कार्य को कैंसिल करके अलग से निविदा आमंत्रित कर ली गई।

विभाग के अधिशासी अभियंता रविन्द्र आर्य और अधीक्षण अभियंता हरदयाल अहिरवार ने सारी हदे पार करते हुए  इन एक से आठ तक की पुनः निकली गई निविदा में चार कार्यों पर चहेतो से अतिरिक्त कम्पटीशन टेंडर पड़ गए जो टेंडर मैनेज हो गए उनको खोल दिया गया जबकि जिन कार्यों पर कंपटीशन हुआ और उन पर प्राप्त शिकायतों की महीनों तक जांच के उपरांत सारे कागजात सही पाए जाने पर टेक्निकल टेंडर खोलकर उसको स्वीकृत कर लिया गया और फाइनेंसियल टेंडर के लिए 30 अक्टूबर 2026 को 12.30 बजे का समय निर्धारित कर दिया गया था।परंतु अपने चहेतो को फायदा पहुंचाने और उनसे लाखों रुपए लेकर अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंता ने टेंडर को निरस्त करने की साजिश की जा रही है। जबकि उसी नोटिस के चार मैनेज टेंडरों को पहले ही खोल दिया गया है।जबकि प्रहरी पर स्वीकृत टेंडर को निरस्त नहीं किया जा सकता है। सूत्रों पर यकीन करे तो अधीक्षण अभियंता हरदयाल और अधिशासी अभियंता रविन्द्र ने क्षेत्रीय माननीय के टेंडर मैनेज करने के चक्कर में शासकीय दिशा निर्देश की धज्जियां उड़ा रहे हैं। नियम विरुद्ध ई टेंडर प्रक्रिया सोशल मीडिया पर वायरल है।फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर देखना यह है कि जिले के तेजतर्रार डीएम इंद्रजीत सिंह  क्या एक्शन लेते है,फिलहाल फर्म के जिम्मेदारों ने विभाग के एमडी,डीएम,सीएम से आन लाइन शिकायत किया है ।

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जानकारों व महकमे के जिम्मेदारों की माने तो एक साथ यदि ई टेंडर डाला गया है तो एक साथ निरस्त अथवा स्वीकृत होगा।प्रहरी ऐप पर पड़े किसी टेंडर को वापस नहीं लिया जा सकता है।यही नहीं टेक्निकल बिड खोलने के बाद फाइनेंशियल बिड खोलने को नियमानुसार रोका नहीं जा सकता है।शिकायत की स्थिति में जांच के बाद यदि टेक्निकल बिड खोल दी गई है। प्राप्त निविदा में कोई कमी नहीं है।तभी पात्र निविदा ओपन हुई है।  पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता हरदयाल अहिरवार के हस्ताक्षर से जारी 30 सितंबर /29अक्टूबर को ओपन टेक्निकल बिड के कार्यालय ज्ञाप से स्पष्ट है कि ऋचा कंस्ट्रशन कंपनी, राज कंस्ट्रशन ,जेपी इंटर प्राइजेज,सर्वेश कुमार सिंह, पंकज सिंह, सम्राट एसोसिएट,विशाल ट्रेडर्स, दिलीप कंस्ट्रशन, एलएवी कंस्ट्रशन,गायत्री कंस्ट्रशन समेत दस फर्मों ने आवेदन किया था।सभी फर्मों के कागजात आदि वैध पाए गए हैं। फर्म के जिम्मेदारों का आरोप है कि महकमे के मुखिया मोटी रकम की मांग कर रहे हैं। सदर क्षेत्र में ये ज्यादातर कार्य प्रस्तावित है,वहां के माननीय के दबाव के चलते पात्र निविदादाताओं को कार्य नहीं मिल पा रहा हैं।वही इन निविदा के बावत अधीक्षण अभियंता हरदयाल अहिरवार का कहना है कि शिकायत मिली है नियमानुसार टेंडर प्रक्रिया पूरी होगी।जब सवाल किया गया कि टेक्निकल बिड खोलने से पहले तो शिकायत की जांच पूरी हो जाती है,बाद में रोकने का कहां नियम है तो फोन काट दिए। फिलहाल दस्तक भारत न्यूज आरोप प्रत्यारोप की पुष्टि नहीं करता है।