भक्तों को दर्शन में न हो कोई असुविधा,तैयारी पूरी।
-लखनऊ- वाराणसी मार्ग से मंदिर धाम तक नवनिर्मित हुआ सीसी मार्ग।
सुल्तानपुर (दस्तक भारत न्यूज)।लोहरामऊ देवी मंदिर (लोहरा भवानी धाम) उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में स्थित एक बेहद प्रसिद्ध, प्राचीन और ऐतिहासिक सिद्धपीठ है। यह पवित्र मंदिर देवी दुर्गा (मां भवानी) को समर्पित है, जहां साल भर और विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।
लोहरामऊ देवी मंदिर पर नवरात्रि के अवसर पर उभरने वाले भक्तों के सैलाब को देखते हुए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था के प्रबंध प्रशासन की तरफ से किए गए हैं। प्राचीन दोनों प्रतिमाओं पर चांदी के स्वर्ण लेप युक्त 2 मुकुट मंदिर प्रशासन की तरफ से चढ़ाए जाएंगे। सजावट और श्रद्धालुओं के आगमन को लेकर पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।इस बार जर्जर मार्ग को पूर्व मंत्री / भाजपा विधायक विनोद सिंह ने हाइवे से मंदिर तक सीसी मार्ग भी बनवा दिए है,जिससे दर्शनार्थियों को कीचड़ आदि से मुक्ति मिल गई हैं।विदित रहे लोहरामऊ देवी धाम शहर से सटा प्राचीन देवी मंदिर है। जहां पर बासंतिक और शारदीय नवरात्र पर सैकड़ों की संख्या में रोजाना श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ता है। इसके मद्देनजर कोतवाली देहात थाना क्षेत्र से पुलिस बल तैनात किए जाते हैं और उप जिलाधिकारी सदर गरिमा सोनकिया की निगरानी में सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक प्रबंध किए गए हैं।
एक दिन पूर्व मंदिर संस्था के अध्यक्ष शिवाकांत तिवारी उर्फ सोखा प्रधान और महामंत्री द्वारा जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह से डीएम के जनता दर्शन में मिलकर व्यवस्था चुस्त दुरुस्त करने की मांग उठाई गई थी। डीएम ने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को व्यवस्था के निर्देश दिए हैं।
क्या है मंदिर की पौराणिक मान्यता
पिंडी स्वरूप: मान्यता है कि बहुत समय पहले यह एक घना जंगल हुआ करता था, जहां एक चरवाहे को नीम के पेड़ के नीचे माता के ‘पिंडी’ (प्राकृतिक स्वरूप) के दर्शन हुए थे। शुरुआत में ग्रामीणों ने चबूतरा बनाकर पूजा शुरू की। मंदिर का इतिहास स्थानीय राजघरानों से भी जुड़ा है। लोककथाओं के अनुसार, जब भदैंया के राजा ने लोहरामऊ राजघराने पर आक्रमण किया, तो स्थानीय लोगों ने माता से रक्षा की गुहार लगाई। इसके बाद एक भयंकर तूफान आया और हमलावर राजा का सिर कट गया (उस स्थान को आज भी ‘मुड़कटनी बाग’ कहा जाता है)। बाद में भदैंया की रानी ने यहां मंदिर और कुएं का निर्माण करवाया।








