Wednesday, October 28, 2026
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मानहानि मामले मे सुल्तानपुर के एमपी-एमएलए कोर्ट ने सुनाया फरमान,बाइज्जत बरी होने पर राहुल गांधी बोले थैंक यू

कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश हुए राहुलगांधी,समर्थकों की जमा रही भीड़

सुलतानपुर(अनुराग द्विवेदी लॉ एडिटर)। गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी के मामले में राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि के केस में सोमवार को राहुल गांधी करीब 11:10 बजे कोर्ट पहुँचे। जिसके बाद करीब 34 मिनट चली कोर्ट की कार्यवाही में एमपी-एमएलए कोर्ट का फैसला आया। स्पेशल मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा की अदालत ने मामले में राहुल गांधी को बरी कर दिया है। कोर्ट के फैसले पर राहुल गांधी ने जज साहब को थैंक्यू कहा,वहीं उनके समर्थकों ने भी न्यायालय के प्रति आभार प्रकट किया एवं खुशी का इजहार किया।


कोतवाली देहात थाने के हनुमानगंज निवासी भाजपा नेता विजय मिश्र ने आठ मई साल 2018 को बैंगलुरू में एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान राहुल गांधी के जरिये गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ की गई टिप्पणी से नाराज होकर मानहानि का मुकदमा दायर किया था। मामले का ट्रायलएमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट में चल रहा था। मामले मे बहस की कार्यवाही लम्बे समय बाद गत 13 अक्टूबर को पूरी हुई थी। मामले में राहुल गांधी के अधिवक्ता ने अपनी लिखित बहस में विवादित बयान को स्वीकार किया था,पर उसे सदभाव मे दिए जाने एवं किसी को अपमानित करने के इरादे से बयान नहीं देने व तोड़-मरोड़कर बयान पेश किए जाने समेत अन्य तर्क रखे थे।वहीं परिवादी पक्ष के अधिवक्ता संतोष पांडेय ने विवादित बयान देने की बात स्वीकार करने के आधार पर राहुल गांधी को दोषी करार किए जाने की मांग अदालत से किया था।अदालत ने दोनों पक्षो की बहस सुनकर सोमवार को फैसले के लिए पत्रावली सुरक्षित किया था। अदालत ने अपने फैसले में राहुल गांधी को बड़ी राहत देते हुए उन्हें बरी कर दिया है। कोर्ट का फैसला आने के दौरान कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी, प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा,प्रदेश प्रवक्ता राजेशतिवारी,जिलाध्यक्ष अभिषेक सिंह राणा,शहर अध्यक्ष शकील अंसारी,वरुण मिश्रा,फिरोज खान,राहुल त्रिपाठी,वरिष्ठ अधिवक्ता रणजीत सिंह त्रिसुंडी, रंजीत सलूजा,बलराम तिवारी एवं सैकड़ो कार्यकर्ता मौजूद रहे।

140 पेशियों में आया कोर्ट का फैसला-

बेंगलुरु में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान आठ मई साल 2018 को बीजेपी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ विवादित टिप्पणी का मामला सामने आया था,जिससे क्षुब्ध होकर चार अगस्त साल 2018 को परिवादी भाजपा नेता विजय मिश्रा ने परिवाद पत्र एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट में प्रस्तुत किया था,जिसके बाद 140 पेशियों तक मुकदमे में साक्षियों के बयान,तलबी आदेश,साक्ष्य एवं अन्य विधिक कार्यवाही अपनाई गई,जिसके बाद मामले में विचारण की प्रक्रिया पूरी होने पर 26 अक्टूबर को अदालत ने अपना फैसला सुनाया।

मानहानि के केस में चार बार राहुल गांधी को आना पड़ा कोर्ट-

अमित शाह के खिलाफ विवादित टिप्पणी के आरोप से जुड़े मामले में कोर्ट से विचारण के लिए तलब करने का आदेश जारी होने के बाद पहली बार 20 फरवरी साल 2024 को हाजिर होकर राहुल गांधी ने मामले में आत्मसमर्पण कर जमानत कराई। दूसरी बार वह 26 जुलाई साल 2024 को एमपी-एमएलए कोर्ट में हाजिर हुए,जिनका बतौर मुल्जिम बयान दर्ज किया गया। गत 20 फरवरी को राहुल गांधी हाजिर हुए तो दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 313 के अंतर्गत उनका बयान दर्ज किया गया और चौथी बार सोमवार को अदालत का फैसला आते समय वह कोर्ट में पेश हुए। कोर्ट में पेश होने के दौरान राहुल गांधी ने बेरोजगारी पर लिखी एक किताब अपने हाथ मे ली थी,जिसको लेकर चर्चाएं होती रही।

कोर्ट ने परिवादी को नहीं माना व्यथित व्यक्ति,49 पन्नों का हुआ आदेश

भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ विवादित टिप्पणी करने के मामले में बयान देने के करीब सवा दो महीने बाद 15 जुलाई साल 2018 को भाजपा के तत्कालीन जिला उपाध्यक्ष विजय मिश्रा ने परिवाद पत्र कोर्ट में पेश किया था। हालांकि विचारण के दौरान उनके व साक्षियों के बयान में कई विरोधाभास पाए गए एवं कोर्ट ने उन्हें व्यथित व्यक्ति भी नहीं माना और ऐसा कोई लांछन या साक्ष्य भी पर्याप्त नहीं माना,जो मानहानिकारक रहा हो। सोमवार को आए फैसले में कोर्ट ने अपने 49 पन्नों के आदेश में कई महत्वपूर्ण तथ्य दर्शाएं है। कोर्ट ने टिप्पणी किया कि ऐसे मामलो से मात्र मुकदमो की बहुलता बढ़ेगी,जिसकी इजाजत कोर्ट नहीं दे सकती। अदालत ने केस के प्रत्येक पहलुओं व उपलब्ध साक्ष्यों पर गौर करते हुए राहुल गांधी को भादवि की धारा 500 के अपराध से दोषमुक्त कर दिया है,जिससे राहुल गांधी को स्पेशल मजिस्ट्रेट कोर्ट से बड़ी राहत मिली है।

सेशन कोर्ट में परिवादी पक्ष फैसले को देगा चुनौती-
 

मानहानि के आरोप से जुड़े मामले में सोमवार को एमपी-एमएलए कोर्ट से आए फैसले पर पारिवादी भाजपा नेता विजय मिश्रा के अधिवक्ता संतोष कुमार पांडेय ने असंतोष व्यक्त है। उन्होंने सूरत से जुड़े पूर्णेश मोदी एवं मीनाक्षी लेखी से जुड़े केस का जिक्र करते हुए भाजपा नेता विजय मिश्रा को भी व्यथित पक्षकार होना बताया एवं अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर राहुल गांधी को मानहानि का जिम्मेदार होना बताया। उन्होंने कोर्ट से आए फैसले का अवलोकन करने के बाद सेशन कोर्ट में क्रिमिनल अपील दाखिल करने की बात कही है।


समर्थकों का वाहन टकराने पर एसआईटी गठित-

मानहानि के मुकदमे में सोमवार को कोर्ट आते समय राहुल गांधी के समर्थको के वाहन बल्दीराय थाना अंतर्गत चकटिहरी गांव के पास पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर टकरा गए,जिसकी सूचना पर पुलिस व संबंधित महकमे में हड़कंप मच गया। डीजीपी राजीव कृष्ण ने मामले में तीन सदस्यीय विशेष जाँच दल (एसआईटी) गठित कर दी है।