Friday, April 4, 2025
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10 वर्षो से एक ही भ्रष्ट कोटेदार करता है कोटे का संचालन:-एक बार फिर जांच में मिल सकती है क्लीन चिट

सुल्तानपुर।कोटेदार के खिलाफ ग्रामीण बोलने अथवा बयान देने से डरते है।अब तक तीन तीन बार आरोपों के चलते कोटा निलंबित हो चुका है। इसके बाद भी सत्ता व पैसे के बल कोटा बहाल कराने में महारथ हासिल कर लेता है।उम्मीद है इस बार की भी जांच में क्लीन चिट फिर मिल सकती है।
मामला कूरेभार ब्लाक के सैद खान पुर ग्राम सभा में संचालित कोटे का है।यहां पर पिछले दस वर्ष से शीतला प्रसाद यादव के कोटा है।आए दिन ग्रामीणों को राशन में घटतौली करने,कभी कभी राशन न बांटने के आरोप लगते रहे हैं।जिलास्तरीय जांच में डीएसओ व सप्लाई इंस्पेक्टर ने कोटेदार के करीबियों का बयान लेते हुए सुविधा शुल्क लेकर अभयदान दे दिया था।मंडलीय टीम भी उसी रास्ते पर चलकर अपनी जेबें गर्म कर शिकायतों को अनसुनी कर क्लीनचिट दी थी।सच तो यह है कि कोटेदार के खिलाफ बयान देने में ज्यादातर राशनकार्ड धारक डरते है।दूसरा यह भी है कि लॉलीपॉप देकर पक्ष में कर लेता है।स्वाभाविक भी है जब अफसर ही फीलगुड के बाद जांच से मुक्त कर देते है तो ग्रामीण की क्या औकात??,कई वर्ष से काबिज होने का मतलब हर फन में माहिर होना है।

जब जिला व मंडल स्तरीय जांच में लीपापोती करते हुए कोटेदार को क्लीनचिट मिलती रही तो करीब डेढ़ दर्जन राशनकार्ड धारक 15नवंबरको डिप्टी सीएम बृजेश पाठक से मिलकर निष्पक्ष जांच की फरियाद किया।करीब चार माह बाद जांच करने अपर एसडीएम विदुषी सिंह गांव पहुंची।फिलहाल कई हजार की आबादी वाले गांव में करीब तीन दर्जन ग्रामीणों से जानकारी की है।वही कोटेदार से डरे सहमे चार दर्जन ग्रामीणों ने दफ्तर में आकर लिखित बयान भी दे चुके हैं। दफ्तर में आकर बयान देने का मकसद ग्रामीणों का यही था कि खुलेआम विरोध का सामना न करना पड़े।ऐसे में देखना यह होगा कि फिर कोटेदार को जांच में क्लीनचिट मिलेगी या कोटेदारी छिनेगी? फिलहाल कई वर्षों से काबिज कोटेदार हटा पाना मुश्किल है।