
- –जनपद के साहित्यकारों का हिंदी सेवा संस्थान अमेठी ने किया सारस्वत सम्मान।
सुलतानपुर। जनपद की धरती साहित्य के क्षेत्र में बड़ी ऐतिहासिक रही है। हिंदी सेवा संस्थान के तत्वावधान में मां गायत्री सभागार अमेठी में नूतन वर्षाभिनंदन एवं हिंदी उत्थान विषय पर कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इसके साथ ही हिंदी भाषा को हर क्षेत्र में प्रमुखता देने का आवाहन किया गया।संस्थान के इस आयोजन पर अतिथियों ने सराहना भी किया।
समारोह की अध्यक्षता राज्य शिक्षक पुरस्कार(राज्यपाल) से सम्मानित व पूर्व प्राचार्य डॉ वेद प्रकाश आर्य एवं मुख्य अतिथि राधेश्याम त्रिपाठी और विशिष्ट अतिथि की भूमिका में भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के अयोध्या मंडल के अध्यक्ष अनुराग द्विवेदी, डॉ.अरविंद चतुर्वेदी ,सरिता भालोटिया, डॉ शरद श्रीवास्तव शरद, डॉ. आशा गुप्ता,प्रो. रेखा श्रीवास्तव, डॉ केशरी शुक्ल, डा.फूलकली गुप्ता मंचासीन रही।
मंडल अध्यक्ष अनुराग द्विवेदी को सुत भारती सम्मान से डा.वेद प्रकाश आर्य ने सम्मानित किया।श्री द्विवेदी ने कहा कि हिंदी को आगे बढ़ाना है तो साहित्य/ पुस्तकीय ज्ञान से युवाओं को जोड़ना होगा।मोबाइल यानी गुगल बाबा से जरूरत भर जुडना होगा।आज के आधुनिक युग मे पुस्तकीय ज्ञान ही सफलता पाने का सबसे सशक्त माध्यम है।
वही अखिल भारतीय साहित्य परिषद के जिलाध्यक्ष आशु कवि मथुरा प्रसाद सिंह जटायु ने कुशल संचालन किया। कार्यक्रम का संस्थान अध्यक्ष/आयोजक अजय जायसवाल अनहद ने किया।कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के पूजा अर्चन के बाद राजबहादुर राना के द्वारा वाणी वंदना -शब्द अर्थ भाव ज्ञान अमृत फुहार दे से हुई।
जिसमें यूपी बोर्ड हिंदी पाठ्यपुस्तक लेखक सर्वेश कांत वर्मा सरल,आईसीएससी बोर्ड की हिंदी पाठ्यपुस्तक के लेखक अनिल कुमार वर्मा मधुर को शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में रमेश चंद शर्मा नंदवंशी, अशोक आचार्य अनंत,बृजेश कुमार वर्मा को साहित्य के क्षेत्र में , राजबहादुर राना को साहित्य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में वरिष्ठ पत्रकार अनुराग द्विवेदी ने प्रशस्ति पत्र दिया। रवि प्रजापति,गांव देहात मीडिया के फाउंडर अंजनी तिवारी व पत्रकार अनुज तिवारी,संतोष श्रीवास्तव,चंदन दुबे,विजय मिश्र आदि को अंगवस्त्रम् एवं सुतभारती सम्मान से सम्मानित किया गया।डा.शरद श्रीवास्तव की पुस्तक ‘था भरोसा फिर मिलोगे’ का विमोचन मंचासीन अतिथियों ने किया।इस मौके पर अवधेश कुमार, घनश्याम वर्मा, चन्द्रभान सिंह, उदयराज वर्मा उदय, डॉ रामजीत,मो. तालिब,कई विद्वानों की उपस्थिति रही।अध्यक्षीय संबोधन में श्री आर्य ने सबका आभार व्यक्त करते हुए हिंदी को ऊंचाई देने में योगदान का आवाहन किया।