मीडिया के सवाल पर बोले संजय निषाद का खानदान दलाल है,मेरा पैर पकड़कर रोता था..
गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में सांसद को नहीं मिला अपेक्षित सम्मान, आधे कार्यक्रम से उठकर लौटे राम भुआल निषाद।
सुल्तानपुर (दस्तक भारत न्यूज )। जिले के पुलिस लाइन ग्राउंड में गणतंत्र दिवस के मौके पर 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में सांसद राम भुआल को उपेक्षा का शिकार होना पड़ा।कायर्क्रम उस समय असहज स्थिति उत्पन्न हो गई, जब कार्यक्रम में शामिल सांसद राम भुआल निषाद को अपेक्षित सम्मान नहीं मिला।एसपी ने सासंद के मौजूद रहने के बाद भी जिलाधिकारी को मुख्यतिथि बनाया था।फिलहाल यह घोषणा पहले से ही थी।खैर वह आधे कार्यक्रम में ही उठकर चले गए। इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।


जानकारी के अनुसार, पुलिस लाइन मैदान में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में जिलाधिकारी कुमार हर्ष मौजूद रहे । कार्यक्रम की शुरुआत डीएम ने झंडारोहण के साथ किया। इसके बाद आकर्षक परेड का आयोजन किया गया। परेड के उपरांत डीएम ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस कर्मियों को प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।वहीं,पुलिस अधीक्षक कुंवर अनुपम सिंह ने जिलाधिकारी को स्मृति चिन्ह (मोमेंटो) भेंट कर सम्मानित किया।हालांकि, पूरे कार्यक्रम के दौरान सांसद राम भुआल निषाद दर्शक दीर्घा में बैठे रहे, लेकिन जिला पुलिस व प्रशासन की ओर से उन्हें कोई औपचारिक सम्मान या मंचीय सहभागिता नहीं दी गई। इसे लेकर सांसद असहज नजर आए और कुछ समय बाद वह कार्यक्रम स्थल से उठकर चले गए। सांसद के अचानक कार्यक्रम छोड़ने से प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई।

सांसद राम भुआल बोले:-संजय निषाद का खानदान दलाल
कार्यक्रम से बाहर निकलने के बाद सांसद राम भुआल निषाद ने पत्रकारों से बातचीत में नाराजगी जाहिर की। इस दौरान उन्होंने मंत्री संजय निषाद पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “दलाल” तक कह डाला। राजनीति में इंट्री संजय की मेरी ही देन हैं।सांसद ने आरोप लगाया कि पहले वही लोग उनके पास आकर समर्थन मांगते थे, लेकिन अब उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है।सांसद के बयान और कार्यक्रम में मिले कथित अपमान को लेकर जिले की राजनीति गरमा गई है।जबकी सांसद भी जिले डाक बंगले में पूर्व संध्या पर ही आ गए थे।रात्रि विश्राम भी किए।खैर जिले के सांसद भले ही थे लेकिन जो ठहरे विपक्षी पार्टी के।ऐसे सत्ता के नुमाइंदे हो या अफसर।प्रोटोकॉल कोई मायने नहीं रखता।जबकि कोई भी सरकारी आयोजन हो या देश का पर्व यदि जनप्रतिनिधि है तो उसे स्थान व सम्मान मिलना चाहिए।विपक्षी दल जहां इसे प्रशासन की चूक बता रहे हैं, वहीं सत्तापक्ष के लोग इसे प्रोटोकॉल से जुड़ा मामला बता रहे हैं। फिलहाल यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।








