Friday, April 4, 2025
Light
Dark

बुरे वक्त में साथ देती है मध्यप्रदेश दतिया की यह देवी मां,चौकाने वाला है देवी माँ की रहस्य

दस्तक भारत न्यूज।श्री पीतम्बरा पीठ को मध्यप्रदेश का मिनी वृंदावन कहा जाता है ।श्री पीताम्बरा पीठ (Pitambara Peeth ) यह दतिया (Datia MP) का एक ऐसा स्थल है जहाँ बगलामुखी माई के दर्शन हेतु लोग दूर दूर से खिंचे चले आते है माँ पीताम्बरा की दतिया में बहुत ही ज्यादा मान्यता है यहाँ पर बड़े बड़े राजनीतिज्ञ व्यक्ति , फ़िल्मी हस्तियाँ दर्शन करने आती रहती है मुख्य रूप से यह मंदिर माँ बगलामुखी (maa Baglamukhi)को समर्पित है और विश्व भर में मात्र यह एक ही मंदिर है जो माँ बगलामुखी को समर्पित है अगर इस शहर के स्थानीय लोगो की माने तो माँ के दरबार से हर व्यक्ति की मनोकामना पूरी होती है |

आपको बता दे कि माँ पीताम्बरा को पीला रंग ज्यादा पसंद है इसलिए यहाँ पीले रंग के फूल , पीले वस्त्र , पीले रंग के लड्डू का इस्तेमाल करना चाहिए माँ पीताम्बरा देवी मन्दिर परिसर में कई मंदिर है जैसे माँ धूमावती मंदिर , धूमावती मंदिर में माँ एक विधवा स्त्री के रूप में पूजी जाती है अच्छा एक और महत्वपूर्ण बात पे ध्यान दे माँ धूमावती (maa Dhoomawati )के दर्शन सिर्फ शनिवार को ही मिलते है तो यदि आप शनिवार को जायेंगे तो आपको माँ बगलामुखी और माँ धूमावती दोनों के दर्शन का लाभ होगा अच माँ धूमावती के दर्शन सौभाग्यवती स्त्रियों के लिए वर्जित है |

पीताम्बरा पीठ मन्दिर के साथ एक ऐतिहासिक सत्य भी जुड़ा हुआ है। सन् 1962 में चीन ने भारत पर हमला कर दिया था। उस समय देश के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू (Jawahar Lal Nehru in Datia)थे। भारत के मित्र देशों रूस तथा मिस्र ने भी सहयोग देने से मना कर दिया था। तभी किसी योगी ने पंडित जवाहर लाल नेहरू से स्वामी महाराज से मिलने को कहा। उस समय नेहरू दतिया आए और स्वामीजी से मिले। स्वामी महाराज ने राष्ट्रहित में एक 51 कुंडीय महायज्ञ करने की बात कही। यज्ञ में सिद्ध पंडितों, तांत्रिकों व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को यज्ञ का यजमान बनाकर यज्ञ प्रारंभ किया गया। यज्ञ के नौंवे दिन जब यज्ञ का समापन होने वाला था, उसी समय ‘संयुक्त राष्ट्र संघ’ का नेहरू जी को संदेश मिला कि चीन ने आक्रमण रोक दिया है, और 11वें दिन अंतिम आहुति के साथ ही चीन ने अपनी सेनाएं वापस बुला ली थीं। मन्दिर प्रांगण में वह यज्ञशाला आज भी बनी हुई है। इसी प्रकार सन् 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी यहाँ गुप्त रूप से पुनः साधनाएं एवं यज्ञ करायें गये थे।

मंदिर परिसर के अन्दर अर्पित किया हुआ प्रसाद मिलता है जिसमे लड्डू मिलते है वो भी पीले रंग के अर्पित किये हुए प्रसाद की कीमत 20 रूपये 50 रूपये निर्धारित है तो कभी भी दतिया आये तो समय निकालकर माँ पीताम्बरा माई के दर्शन अवश्य करे विश्व विख्यात माँ पीताम्बरा पीठ का मन्दिर दतिया के बस स्टैंड से थोड़ी ही दूरी पर राजगढ़ चोक के पास स्थित है |