
हम सबको पूरे पागलपन से पर्यावरण को बचाना होगा-डॉ हीरा लाल IAS
प्लास्टिक न बन्द होने का सबसे बड़ा कारण है सरकारी तंत्र की मोटी चर्बी-सुधीर मिश्र
प्लास्टिक कचरा आज भारत और दुनिया की सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौती
लखनऊ।पृथ्वी दिवस पर्यावरण संरक्षण के नजरिए से साल का अहम दिन होता है. हर साल 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस दिन पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लोगों की जागरुकता और उनकी हिस्सेदारी को बढ़ाने पर जोर दिया जाता है. इस साल अर्थ डे 2024 का थीम है ‘प्लेनेट वर्सेज प्लास्टिक’ Planet vs Plastic यानाी ग्रह बनाम प्लास्टिक. इस थीम का मकसद सिंगल यूज प्लास्टिक के खपत को कम करने के लिए लोगों में जागरुकता फैलाना है. कोशिश की जाएगी कि 2040 तक प्लास्टिक के इस्तेमाल में 60 फीसदी तक गिरावट आ सके।
पृथ्वी सिर्फ़ मनुष्यों की ही नहीं बल्कि करोड़ों जीव-जंतुओं और वनस्पतियों के रहने का स्थान है या यूं कहें कि यह सबका घर है. लेकिन, मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पृथ्वी को लगातार नुकसान पहुंचाता जा रहा है. जिसके चलते प्राकृतिक आपदाएं देखने को मिल रही हैं. प्रकृति इस तरीके से अनबैलेंस हो गई है कि बाढ़, पॉल्यूशन, क्लाइमेट चेंज, ग्लोबल वॉर्मिंग जैसी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं.इसी मुहिम को देश के हर अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित होटल में जागरूकता कार्यक्रम का वृहद आयोजन हुआ। ग्रेटर शारदा सहायक यूपी चैयरमैन आईएएस डॉ हीरालाल के संयोजन में Planet vs Plastic:-Harmony in Action with Jal,Jungle,Zameen कार्यक्रम में हमारी पृथ्वी को संरक्षित करने के लिए विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
हम सबको पूरे पागलपन से पर्यावरण को बचाना होगा-डॉ हीरा लाल IAS
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आईएएस डॉ हीरालाल ने कहा कि हमे अपनी पृथ्वी को सुरक्षित व संरक्षित करने के लिए तन मन धन से लगना होगा।उन्होंने कहा कि आपने के शब्द सुना होगा “पागलपन” इस शब्द से अभिप्राय सकारात्मक रूप में यह है कि हमे पृथ्वी व पर्यावरण को बचाने के लिए पागलपन से काम करना होगा।डॉ हीरा लाल ने कहा कि हमे स्वयं से जानकारी इकट्ठा करके जल-जंगल-जमीन के प्रति जानकारी को हर व्यक्ति तक पहुंचाना होगा।डॉ० हीरा लाल, अध्यक्ष एव प्रशासक द्वारा विभिन्न जिलों से आये हुए मीडिया कर्मियों से आवाहन किया कि प्लास्टिक के बारे में जागरूकता फैलाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है और इस कार्य मे मीडिया सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति जितना आक्सीजन लेता है उसको उतनी ऑक्सीजन वर्षभर में उसको उत्पन्न करनी चाहिए। इसी प्रकार उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति जितना पानी का प्रयोग करता है उसको उतना वर्षा का जल रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का प्रयोग कर बचाना चाहिए। उन्होंने मीडिया कर्मी अपने अपने जिलों में इस विषय का प्रचार प्रसार करे कि प्लास्टिक हमारे और हमारे पृथ्वी के लिए कितना खतरनाक है। इस विषय में समाज को जागरूक करना अत्यन्त आवश्यक है तभी हम पृथ्वी को प्लास्टिक से मुक्त कर सकते हैं।

प्लास्टिक न बन्द होने का सबसे बड़ा कारण है सरकारी तंत्र की मोटी चर्बी-सुधीर मिश्र
एक अखबार के एडिटर सुधीर मिश्र ने कहा कि हमे प्लास्टिक बन्द होने का सबसे बड़ा कारण है सरकारी तंत्र की मोटी चर्बी।उन्होंने कहा कि जब प्लास्टिक बैन होने की कारवाई की बात आती है तो जिम्मेदार सरकारी अधिकारी व कर्मी अभियान के नाम पर खानापूर्ति की जाती है।उसके नाम पर मोटी कमाई की जाती है।उन्होंने कहा प्लास्टिक बन्द तब होगा जब हम और हमारी जनता Plastic के उपयोग व दुरपयोग दोनों के बारे जागरूक होंगे।तो सबसे पहले हमें स्वयं से जागरूक होकर जागरूकता अभियान को चलाना व सफल बनाना होगा।
प्लास्टिक कचरा आज भारत और दुनिया की सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौती
कार्यक्रम का शुभारम्भ डॉ० हीरा लाल, अध्यक्ष एवं प्रशासक, ग्रेटर शारदा सहायक परियोजना, राज कुमार प्रबन्ध निदेशक स्वच्छ भारत मिशन उ०प्र०, राजीव यादव अपर आयुक्त ग्रेटर शारदा, गीता गाँधी किंगडन प्रेसिडेन्ट सी०एम०एस० तथा पदमश्री सुधा सिह ने किया गया। आगा खाँ फाउण्डेशन,(Aga Khan Foundation)वाटर ऐड(Wateraid), एक्शन ऐड(Action aid), सी०एम०एस०(CMS), इरिगेशन एसोसिएशन( IRRIGATION Association) के संयोजन में पदमश्री सुधा सिंह ने जल की आवश्यकताओं पर बल देते हुए प्लास्टिक के प्रयोग को कम करने का आवाहन किया। गीता गाँधी किंगडन ने विश्व के परिप्रेक्ष्य में प्लास्टिक कचरे को समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होने इस सदर्भ में विशेष रूप से नदियों, तालाबो आदि में डाले जा कचरे को साफ करने की जरूरत को बताया, जो कि पर्यावरण को दूषित कर रहा है। राजीव यादव अपर आयुक्त ने कहा कि वर्तमान युग, एक प्लास्टिक युग की भाँति हो गया है। प्लास्टिक रसायन के कारण ब्रेन, हृदय, पैरालाइसिस जैसी बीमारियों हो रही है। प्लास्टिक एक स्लो प्वाइजन है, जो मानव स्वास्थ्य और पृथ्वी के स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित कर रहा है।


Earth Day Summit में इन्होंने किया प्रतिभाग,दिया सुझाव
इस अवसर पर चार चरण में परिचर्चा हुई। जिनमें अरूण सिन्हा सेवानिवृत्त अपर मुख्य सचिव, संजय भूसरेड्डी सेवानिवृत्त अपर मुख्य सचिव एव अध्यक्ष रेरा उ०प्र०, आशुतोष शुक्ला, राज्य सम्पादक, सुधीर मिश्रा स्थानीय सम्पादक, प्रांशु मिश्रा स्थानीय सम्पादक,पदमश्री राम शरन वर्मा, पदमश्री बाबू लाल दहिया, पद्मश्री सुधा सिंह, आगा खॉ फाउण्डेशन, वाटर ऐड, एक्शन ऐड के प्रतिनिधियों तथा डॉ० रोहित बघेल, विलियम जे क्लिंटन फाउण्डेशन छत्तीसगढ, आशीष कुलकर्णी पार्टनर बी०सी०जी० सोशल इम्पैक्ट आदि द्वारा भाग लिया गया। समूह परिचर्चा में सौरभ लाल, सी०ई०ओ० मॉडल गाँव (Saurabh Lal CEO Model Goan), अर्पित गुप्ता सहायक सम्पादक, इभा सिंह और ओम सिंह द्वारा पैनल डिस्कशन का संचालन किया। इस अवसर पर प्रदेश के लगभग 35 जिलों के प्रिन्ट मीडिया, इलेक्ट्रानिक मीडिया, सोशल मीडिया, रेडियो सवांददाता आदि द्वारा अपनी सहभागिता दी गयी। पैनल डिस्कशन में प्रश्नोत्तरो के माध्यम से प्लास्टिक से पृथ्वी से बचाने हेतु विभिन्न प्रयासों पर चर्चा की गयी। कार्यक्रम को ग्रेटर शारदा सहायक समादेश क्षेत्र विकास प्राधिकारी/परियोजना ने विभिन्न जिलो में सभी भूमि संरक्षण इकाईयों कार्यक्रम आयोजित करवाया गया। कार्यक्रम के अंत में जयराम पाठक आगा खॉ फाउण्डेशन ने धन्यवाद ज्ञापन किया।